Vijay Kumar Malhotra की पूरी जीवन कहानी — जन्म से लेकर राजनीति, खेल प्रशासन, लोकसभा से लेकर दिल्ली राजनीति और अंत तक। Hindi-English mix में पढ़ें इस गुरू राजनेता की विरासत।
विजय कुमार मल्होत्रा: राजनीति का वो सफर जो दिल्ली को बदल गया
हिंदुस्तान की राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो सिर्फ “नेता” नहीं होते — वो एक युग (era) होते हैं। Vijay Kumar Malhotra उन्हीं नामों में से थे। उनके बिना दिल्ली भाजपा की कहानी अधूरी है। 30 सितंबर 2025 को उनका निधन हो गया, और आज उनके जीवन, संघर्ष, उपलब्धियों और उनसे मिलने वाली सीखों पर हम एक सफर निकालेंगे।
बचपन और प्रारंभिक जीवन
Vijay Kumar Malhotra का जन्म 3 दिसंबर 1931 को Lahore (उस समय पंजाब, British India) में हुआ था।
वह सात बच्चों में चौथे नंबर पर थे। उनके पिता का नाम Kaviraj Khazan Chand था।
Partition (विभाजन) के बाद, जब देश विभाजित हुआ, तो Malhotra परिवार को भारत आना पड़ा। यह कठिन दौर था — कई परिवारों की ज़िंदगी बिखर गई थी — लेकिन इसी संघर्ष ने उनमें जीवन की लड़ाई की आग जलाई।
शिक्षा के क्षेत्र में, Malhotra ने हिंदी साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि ली।
उनकी यह विद्वत्ता (scholarship) आगे की राजनीति और सार्वजनिक सेवा में हमेशा काम आई।
राजनीतिक आरंभ — Jana Sangh और शुरुआती संघर्ष
Malhotra की राजनीतिक शुरुआत Bharatiya Jana Sangh से हुई।
1972 में उन्हें Delhi Pradesh Jana Sangh का अध्यक्ष चुना गया, और वे 1975 तक उस पद पर रहे।
उस समय राजनीति आसान नहीं थी — इमरजेंसी जैसे दमनकाल, राजनीतिक दमन, विरोधी पार्टियों पर दबाव — ऐसे माहौल में Jana Sangh और उसके नेताओं को जमीन संभाले रखना पड़ता था। Malhotra ने इसी संघर्ष में अपना नाम बनाया।
जब 1980 में BJP (Bharatiya Janata Party) का गठन हुआ, तो Malhotra ने दिल्ली इकाई को मजबूत करने का काम संभाला।
उन्होंने दो बार दिल्ली BJP के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया — 1977 से और बाद में 1980–84 तक।
उनका मानना था कि दिल्ली जैसे केंद्र में BJP को मजबूत organizational structure चाहिए — न कि सिर्फ charismatic नेता की dependance। इसी सोच ने उन्हें पार्टी के संरचनात्मक नेता बनाया, न कि लोकप्रिय चेहरा ही।
लोकसभा, विधानसभा और दिल्ली राजनीति
Malhotra का राजनीतिक सफर सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहा — वे जनता की राजनीति में भी सक्रिय रहे। उन्होंने 5 बार Lok Sabha और 2 बार Delhi Legislative Assembly (MLA) का चुनाव जीता।
Lok Sabha
Malhotra ने South Delhi और Delhi Sadar निर्वाचन क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व किया।
उनकी सबसे चर्चित जीत 1999 की थी, जब उन्होंने Manmohan Singh (जो बाद में प्रधानमंत्री बने) को पराजित किया।
ये जीत symbolic थी — यह दिखाती थी कि Malhotra सिर्फ पार्टी नेता नहीं, जनता के बीच accepted figure भी था।
विधानसभा / दिल्ली स्तर
2008 में, BJP ने उन्हें दिल्ली विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।
वह Greater Kailash सीट पर जीते।
हालांकि BJP केंद्र को नहीं हिला पाई, लेकिन Malhotra ने विधानसभा में Leader of Opposition का पद संभाला।
दिल्ली की Metropolitan Council में, 1967–71 के बीच उन्होंने Chief Executive Councillor के रूप में कार्य किया — उस समय की व्यवस्था विधानसभा बनने से पहले की थी।
उनके कार्यकाल में कई बुनियादी योजनाएं शुरू हुईं, जैसे कि पटेल नगर से मोती नगर तक फलाईओवर जैसी परियोजनाएं।
उनकी Clean Image (स्वच्छ छवि) ने हमेशा राजनीति में उन्हें दूसरी तुलना से अलग रखा।
खेल और खेल प्रशासन में भूमिका
Malhotra सिर्फ राजनेता ही नहीं थे — वे sports administration में भी सक्रिय थे। उनका यह पक्ष भी काफी प्रेरणादायक था।
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उन्होंने Archery Association of India की अध्यक्षता की।
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Indian Olympic Association (IOA) के acting president बने जब Suresh Kalmadi पर Commonwealth Games विवादों के बाद IOA अध्यक्ष पद खाली हुआ।
उनका tenure April 2011 से December 2012 तक रहा। -
इसके अलावा, उन्होंने National Sports Federations की General Association का नेतृत्व किया।
उनकी सोच ये थी कि राजनीति और खेल दो ऐसे माध्यम हैं, जिनसे युवा जुड़ सकते हैं और देश को एक सकारात्मक पहचान दी जा सकती है।
योगदान और व्यक्तित्व
Vijay Kumar Malhotra का व्यक्तित्व और योगदान कुछ विशेष बातों में झलकता है:
1. संगठनात्मक ताकत
जब BJP दिल्ली में कमजोर थी, Malhotra जैसे नेताओं ने grassroots level पर काम किया, पार्टी कार्यकर्ताओं को जोड़ा और structure बनाया।
2. स्वच्छ राजनीति
उनकी राजनीति में भ्रष्टाचार का कलंक नहीं मिला। वे हमेशा अपनी छवि, ईमानदारी और उत्तरदायित्व के लिए जाने गए।
3. विचारशील वक्तव्य
Parliament और विधानसभा में उन्होंने संवैधानिक मुद्दों, सामाजिक न्याय और जनता की समस्याओं पर कई गंभीर interventions दिए।
4. धैर्य और समर्पण
राजनीति में ups and downs आते रहते हैं। लेकिन लाख मुश्किलों का सामना करते हुए भी Malhotra ने कभी पार्टी और सिद्धांत को नहीं छोड़ा।
उत्तरार्ध — निधन और शोक
30 सितंबर 2025 को, Dr. Vijay Kumar Malhotra का निधन हो गया।
वे AIIMS, दिल्ली में उपचाराधीन थे।
उनके निधन पर देश भर में condolences की बाढ़ आई — प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, दिल्ली भाजपा सहित तमाम नेताओं ने उनकी महान सेवा और आदर्श जीवन की चर्चा की।
दिल्ली भाजपा ने बयान किया कि Malhotra ने उस आधार को रखा जिसे आज पार्टी ऊपर तक ले गई है।
उनका जाना एक युग का अंत है — लेकिन वह यादों, विचारों और प्रेरणा के रूप में आज भी जीवित हैं।
Vijay Kumar Malhotra से मिलती सीख
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Structure Matters — सिर्फ charismatic नेता नहीं, मज़बूत संगठन बनाना ज़रूरी है।
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Clean Image is Long Term Asset — राजनीति में ईमानदारी हर वक्त काम करती है।
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कई क्षेत्रों में योगदान — राजनीति के साथ खेल प्रशासन जैसा क्षेत्र भी चुन सकते हैं।
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संघर्ष से भागो मत — कठिन समय में टिके रहना ही असली परीक्षा है।
FAQs
Q1. Vijay Kumar Malhotra का पूरा नाम क्या था और वे कब जन्मे?
उनका पूरा नाम Vijay Kumar Malhotra था, जन्म 3 दिसंबर 1931 को Lahore (अब पाकिस्तान) में हुआ।
Q2. उन्होंने राजनीति में कहाँ-कहाँ सेवा की?
Malhotra ने Lok Sabha में 5 बार सदस्यता की, दिल्ली विधानसभा में 2 बार और Delhi Metropolitan Council में भी काम किया।
उन्होंने Delhi BJP के अध्यक्ष पद पर भी काम किया, और IOA के acting president भी रहे।
Q3. उनका सबसे प्रसिद्ध चुनावी मुकाबला किससे था?
1999 में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh को हराया — यह उनके राजनीतिक जीवन की एक बड़ी जीत मानी जाती है।
Q4. उन्होंने खेल प्रशासन में क्या योगदान दिया?
वे Archery Association of India के अध्यक्ष रहे, IOA के acting president रहे, और National Sports Federations से जुड़े रहे।
Q5. Malhotra की विरासत आज कैसे है?
उनकी विरासत संगठनात्मक शक्ति, स्वच्छ राजनीति और दिल्ली में BJP की नींव है। आज भी कई नेता उनकी सोच से प्रेरणा लेते हैं।
निष्कर्ष
Vijay Kumar Malhotra सिर्फ एक राजनेता नहीं थे — वो एक विचार, एक संरचना और एक आदर्श थे। उनके जीवन की कहानी हमें सिखाती है कि राजनीति सिर्फ सत्ता नहीं, सेवा का नाम है।
उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा बनी रहेगी।
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