सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 324 दर्ज किया गया, जो ‘रेड जोन’ में आता है। इसका मतलब है कि हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है और इससे सामान्य लोगों के साथ-साथ स्वस्थ व्यक्तियों को भी परेशानी हो सकती है।
नोएडा का AQI 324 रेड जोन में — क्या है खतरे का स्तर?
एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI 324) 0 से 500 तक होता है। इसमें:
- 0-50: अच्छी हवा
- 51-100: संतोषजनक
- 101-200: मध्यम प्रदूषण
- 201-300: खराब
- 301-400: बहुत खराब (Very Poor)
- 401-500: गंभीर (Severe)
324 के AQI के साथ, नोएडा की हवा ‘Very Poor’ कैटेगरी में आ चुकी है। यह स्तर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।
क्यों बढ़ रहा है Noida में प्रदूषण?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मौसम के बदलाव के साथ-साथ कई कारण हैं जिनकी वजह से नोएडा की हवा इतनी खराब हुई है:
- दिल्ली-एनसीआर में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं।
- वाहनों का धुआं — खासकर डीजल ट्रकों और पुरानी गाड़ियों से निकलने वाला।
- कंस्ट्रक्शन साइट्स से उड़ने वाली धूल और मिट्टी।
- ठंडी हवाओं के कारण प्रदूषक जमीन के करीब जम गए हैं।
- फैक्ट्री एमीशन्स और बिजली उत्पादन यूनिट्स का उत्सर्जन।
लोगों पर असर: सांस लेना हुआ मुश्किल
नोएडा सेक्टर 62, 18 और 71 के इलाकों में लोगों ने बताया कि सुबह की सैर के दौरान सांस लेने में दिक्कत हुई। कई लोगों को गले में जलन और सिरदर्द जैसी परेशानी महसूस हुई।
डॉक्टर्स के मुताबिक, ऐसे मौसम में बाहर निकलने से बचना चाहिए और घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना फायदेमंद है।
विशेषज्ञों की राय
AIIMS की पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. नीति अग्रवाल कहती हैं —
“AQI 300 से ऊपर का स्तर बेहद खतरनाक है। अगर स्थिति ऐसे ही रही तो सांस संबंधी बीमारियों में 25-30% तक बढ़ोतरी हो सकती है।”
प्रशासन की कार्रवाई
नोएडा अथॉरिटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्थिति पर काबू पाने के लिए कुछ सख्त कदम उठाए हैं:
- सड़क किनारे पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल।
- कंस्ट्रक्शन साइट्स पर डस्ट कंट्रोल नियमों की जांच।
- पुरानी डीजल गाड़ियों की जांच और चालान।
- जनता से अनुरोध कि वे कम से कम गाड़ियों का इस्तेमाल करें।
लोगों के लिए बचाव के उपाय
अगर आप नोएडा में रहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें।
- N95 या N99 मास्क का इस्तेमाल करें।
- घर में पौधे जैसे स्नेक प्लांट, एलोवेरा, और पीस लिली लगाएं।
- एयर प्यूरीफायर चालू रखें और खिड़कियां बंद रखें।
- ज्यादा पानी पिएं और हेल्दी डाइट लें।
क्या यह सिर्फ नोएडा की समस्या है?
नहीं, यह केवल नोएडा तक सीमित नहीं है। दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी प्रदूषण का स्तर ‘बहुत खराब’ दर्ज किया गया है।
वातावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्रीय स्तर पर कठोर नीतियां नहीं अपनाई जातीं, तब तक इस समस्या का समाधान असंभव है।
आने वाले दिनों में स्थिति कैसी रहेगी?
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में ठंडी हवाएं और कम तापमान की वजह से प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है।
हवा की गति कम होने से प्रदूषक कण जमीन के पास रह जाते हैं, जिससे AQI में सुधार की उम्मीद फिलहाल कम है।
निष्कर्ष – AQI 324
नोएडा की हवा आज ‘रेड अलर्ट’ में है — और यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि लोगों की सेहत के लिए खतरे की घंटी है। प्रशासन की जिम्मेदारी जितनी है, उतनी ही नागरिकों की भी।
अगर हम सभी मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएं — जैसे गाड़ियों की संख्या कम करना, पौधे लगाना, और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना — तो यह जहर भरी हवा भी एक दिन फिर से साफ हो सकती है।
FAQs (AQI 324)
1. नोएडा का AQI 324 होने का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि नोएडा की हवा बहुत खराब है और इससे सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
2. क्या बच्चों के लिए यह हवा खतरनाक है?
हां, बच्चों और बुजुर्गों को इससे सबसे ज्यादा खतरा है। उन्हें घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है।
3. AQI कैसे सुधर सकता है?
वाहनों के उत्सर्जन को कम करके, पेड़ लगाकर, और निर्माण स्थलों पर डस्ट कंट्रोल करके।
4. क्या एयर प्यूरीफायर मदद करता है?
हां, घर के अंदर की हवा को साफ रखने में एयर प्यूरीफायर बहुत मददगार होता है।
5. क्या यह स्थिति कुछ दिनों तक रहेगी?
मौसम विभाग के अनुसार, ठंड बढ़ने के साथ हवा में सुधार फिलहाल मुश्किल है।
लेखक: India Akhbar टीम
स्रोत: CPCB, IMD, और स्थानीय रिपोर्ट्स
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