FIR and NCR ,अक्सर जब हम पुलिस स्टेशन जाने की बात करते हैं तो दो शब्द बार-बार सुनने को मिलते हैं — FIR और NCR। बहुत से लोगों को लगता है कि दोनों एक ही चीज़ हैं, बस नाम अलग है। लेकिन सच यह है कि दोनों की कानूनी हैसियत, प्रक्रिया और प्रभाव अलग-अलग होते हैं।
अगर आपको कभी पुलिस में शिकायत दर्ज करनी पड़े, तो यह जानना बेहद ज़रूरी है कि कब FIR दर्ज होती है और कब NCR, और दोनों में क्या कानूनी अंतर है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे:
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FIR क्या है?
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NCR क्या है?
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दोनों में मुख्य अंतर
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किन मामलों में कौन दर्ज होता है
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पीड़ित के अधिकार
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पुलिस की शक्तियाँ
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गलतफहमियाँ और सच्चाई
FIR क्या होती है?
FIR का पूरा नाम है:
👉 First Information Report
यह वह पहली आधिकारिक रिपोर्ट होती है जो पुलिस किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की सूचना मिलने पर दर्ज करती है।
भारत में FIR दर्ज करने की प्रक्रिया Code of Criminal Procedure की धारा 154 के तहत होती है।
संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) क्या होता है?
संज्ञेय अपराध वह अपराध होता है जिसमें:
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पुलिस बिना अदालत की अनुमति के गिरफ्तारी कर सकती है
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पुलिस तुरंत जांच शुरू कर सकती है
उदाहरण:
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हत्या
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बलात्कार
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अपहरण
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डकैती
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गंभीर मारपीट
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दहेज मृत्यु

FIR दर्ज होने के बाद क्या होता है?

FIR दर्ज होने के बाद क्या होता है?
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पुलिस जांच शुरू करती है
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साक्ष्य इकट्ठा किए जाते हैं
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आरोपी की गिरफ्तारी हो सकती है
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चार्जशीट कोर्ट में दाखिल होती है
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मामला ट्रायल में जाता है
FIR एक बहुत मजबूत कानूनी दस्तावेज होता है।
NCR क्या होती है?
NCR का मतलब है:
👉 Non-Cognizable Report
यह उन मामलों में दर्ज होती है जो असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence) की श्रेणी में आते हैं।
NCR दर्ज करने की प्रक्रिया Code of Criminal Procedure की धारा 155 के तहत होती है।
असंज्ञेय अपराध क्या होता है?
असंज्ञेय अपराध में:
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पुलिस बिना अदालत की अनुमति के गिरफ्तारी नहीं कर सकती
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पुलिस सीधे जांच शुरू नहीं कर सकती
उदाहरण:
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मामूली झगड़ा
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गाली-गलौज
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साधारण मारपीट
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धमकी (हल्की श्रेणी की)
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सार्वजनिक शांति भंग करना

NCR दर्ज होने के बाद क्या होता है?

NCR दर्ज होने के बाद क्या होता है?
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पुलिस शिकायत दर्ज करती है
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कोर्ट की अनुमति के बिना जांच नहीं होती
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पीड़ित चाहे तो अदालत में आवेदन दे सकता है
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अदालत अनुमति दे तो जांच शुरू होती है
FIR और NCR में मुख्य अंतर
| आधार | FIR | NCR |
|---|---|---|
| पूरा नाम | First Information Report | Non-Cognizable Report |
| अपराध का प्रकार | संज्ञेय | असंज्ञेय |
| पुलिस की शक्ति | तुरंत जांच और गिरफ्तारी | कोर्ट अनुमति जरूरी |
| गंभीरता | गंभीर अपराध | कम गंभीर अपराध |
| कानूनी प्रभाव | मजबूत केस बनता है | सीमित प्रभाव |
उदाहरण से समझिए
केस 1: किसी ने मोबाइल छीन लिया
यह लूट है → FIR दर्ज होगी
केस 2: पड़ोसी ने गाली दी
यह मामूली झगड़ा → NCR दर्ज होगी
कानून क्या कहता है?
भारत में आपराधिक मामलों की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है:
👉 Code of Criminal Procedure
इस कानून में स्पष्ट लिखा है:
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धारा 154 → FIR
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धारा 155 → NCR
क्या पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर सकती है?
नहीं।
अगर अपराध संज्ञेय है, तो पुलिस FIR दर्ज करने से मना नहीं कर सकती।
अगर मना करे तो:
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एसपी को लिखित शिकायत
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मजिस्ट्रेट कोर्ट में आवेदन
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हाईकोर्ट में याचिका
Zero FIR क्या होती है?
Zero FIR वह FIR होती है जो किसी भी थाने में दर्ज की जा सकती है, चाहे अपराध किसी अन्य क्षेत्र में हुआ हो।
बाद में केस संबंधित थाने में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
FIR दर्ज कराने के फायदे
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कानूनी रिकॉर्ड बनता है
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जांच अनिवार्य हो जाती है
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आरोपी पर कार्रवाई संभव
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बीमा क्लेम में सहायक
NCR दर्ज कराने के फायदे
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शिकायत का रिकॉर्ड बनता है
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भविष्य में विवाद बढ़े तो प्रमाण मिलता है
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कोर्ट में उपयोग हो सकता है
FIR बनाम NCR — गलतफहमियाँ
❌ मिथक: NCR बेकार है
✅ सच्चाई: यह भविष्य के लिए सबूत बन सकती है
❌ मिथक: पुलिस FIR दर्ज नहीं कर सकती
✅ सच्चाई: संज्ञेय अपराध में दर्ज करना अनिवार्य है
कोर्ट की भूमिका
FIR के मामले सीधे न्यायिक प्रक्रिया में जाते हैं।
NCR में कोर्ट की अनुमति से जांच शुरू होती है।
कानूनी दृष्टि से अंतर
FIR एक मजबूत अभियोजन प्रक्रिया शुरू करती है।
NCR केवल शिकायत दर्ज करती है।
FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया
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नजदीकी पुलिस स्टेशन जाएं
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लिखित शिकायत दें
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शिकायत की कॉपी लें
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FIR नंबर नोट करें
NCR दर्ज कराने की प्रक्रिया
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थाने में मौखिक या लिखित शिकायत
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NCR नंबर प्राप्त करें
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आवश्यक हो तो कोर्ट में आवेदन करें
नागरिकों के अधिकार
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FIR की मुफ्त कॉपी पाने का अधिकार
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FIR दर्ज न हो तो उच्च अधिकारी से शिकायत
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जांच की प्रगति जानने का अधिकार
महत्वपूर्ण सुझाव
✔ शिकायत लिखित में दें
✔ तारीख और समय नोट करें
✔ गवाहों का नाम लिखें
✔ FIR की कॉपी जरूर लें
निष्कर्ष
FIR और NCR दोनों अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
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FIR गंभीर अपराधों के लिए
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NCR मामूली अपराधों के लिए
किसी भी कानूनी समस्या में सही जानकारी होना सबसे बड़ी ताकत है।
❓ FAQs
Q1: क्या NCR को FIR में बदला जा सकता है?
हाँ, यदि अपराध गंभीर साबित हो जाए।
Q2: FIR कितने समय में दर्ज होनी चाहिए?
तुरंत।
Q3: क्या ऑनलाइन FIR दर्ज हो सकती है?
कई राज्यों में हाँ।
Q4: FIR और शिकायत में अंतर?
FIR कानूनी प्रक्रिया शुरू करती है, सामान्य शिकायत नहीं।
📢 अंतिम संदेश
कानून की जानकारी आपको मजबूत बनाती है।
अगर कभी कानूनी स्थिति आए — समझदारी से कदम उठाएं।
जानकारी ही सुरक्षा है।
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