🎇 ग्रीन पटाखों की अनुमति – उम्मीद और हकीकत
सरकार ने इस बार केवल “ग्रीन पटाखे” चलाने की अनुमति दी थी, जो सामान्य पटाखों से लगभग 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या लोगों ने वाकई में केवल ग्रीन पटाखे ही चलाए?
ग्राउंड रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया वीडियोज बताते हैं कि दिल्ली के कई इलाकों — जैसे लक्ष्मी नगर, पटेल नगर, द्वारका और शाहदरा — में देर रात तक पारंपरिक पटाखों की तेज आवाजें सुनाई देती रहीं। इससे यह साफ है कि नियमों का पालन पूरी तरह नहीं हुआ।
💨 दिल्ली-एनसीआर का AQI रिकॉर्ड: दिवाली की अगली सुबह क्या रहा हाल
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिवाली की रात से अगले दिन सुबह तक दिल्ली का औसत AQI 457 दर्ज किया गया। कुछ इलाकों में तो ये आंकड़ा 500+ तक पहुंच गया, यानी “Hazardous” लेवल।
| स्थान | AQI स्तर (दिवाली के अगले दिन) |
|---|---|
| आनंद विहार | 498 |
| रोहिणी | 472 |
| गुरुग्राम | 456 |
| नोएडा | 460 |
| फरीदाबाद | 445 |
यानी एक रात की खुशी ने हवा को इतना खराब कर दिया कि बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई।
😷 प्रदूषण के कारण – पटाखे ही नहीं, कई और वजहें
- पटाखे: दिवाली की रात करीब 8 घंटे तक लगातार पटाखों की आतिशबाज़ी हुई।
- स्टबल बर्निंग: पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई।
- वाहनों का धुआं: त्योहारों के कारण ट्रैफिक का दबाव दोगुना हो गया।
- मौसम की स्थिति: ठंडी हवा और नमी ने स्मॉग को नीचे रोक दिया।
इन सभी कारणों ने मिलकर दिल्ली की हवा को जहरीला बना दिया, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो गया।
🚫 सरकार के कदम – क्या किए गए उपाय?
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP (Graded Response Action Plan) लागू कर दिया है। इसके तहत:
- स्कूलों में आउटडोर गतिविधियाँ रोक दी गई हैं।
- कंस्ट्रक्शन साइट्स पर सख्त पाबंदी लगाई गई है।
- डस्ट कंट्रोल टीम्स को डिप्लॉय किया गया है।
- सड़क पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन्स का उपयोग बढ़ाया गया है।
फिर भी प्रदूषण कम नहीं हुआ क्योंकि लोगों का सहयोग अधूरा रहा।
🌍 दिल्ली बनाम अन्य शहर – किसकी हवा कितनी खराब?
दिवाली के अगले दिन पूरे उत्तर भारत में हवा की स्थिति खराब रही।
| शहर | AQI | स्थिति |
|---|---|---|
| दिल्ली | 457 | गंभीर |
| नोएडा | 460 | गंभीर |
| लखनऊ | 365 | बहुत खराब |
| पटना | 390 | बहुत खराब |
| मुंबई | 210 | मध्यम |
दिल्ली-NCR का औसत AQI देश के किसी भी अन्य शहर से अधिक रहा।





👩⚕️ डॉक्टरों की चेतावनी: अगले 10 दिन सबसे खतरनाक
AIIMS और सफदरजंग अस्पताल के पल्मोनरी विशेषज्ञों ने बताया है कि दिवाली के बाद 7-10 दिन तक हवा में PM 2.5 और PM 10 का स्तर सबसे ज्यादा रहता है।
इससे खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को भारी नुकसान होता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग N95 मास्क पहनें और सुबह की सैर फिलहाल टालें।
💬 लोगों की राय – “हवा में जश्न नहीं, जहर घुल गया”
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने गुस्सा जताया है। कुछ ने लिखा — “दिवाली मनानी थी, जहरीली नहीं बनानी थी।” वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ग्रीन पटाखों की पहचान करना ही मुश्किल था।
“सरकार ने तो कहा था ग्रीन पटाखे चलाइए, लेकिन दुकानों पर वही पुराने पटाखे बिक रहे थे। जनता को समझ नहीं आया कि कौन सा ग्रीन है।” — रोहित शर्मा, द्वारका निवासी
🧪 ग्रीन पटाखे क्या हैं और कैसे काम करते हैं?
ग्रीन पटाखे CSIR-NEERI द्वारा विकसित किए गए हैं, जिनमें सल्फर और नाइट्रेट की मात्रा कम होती है। ये 30% कम PM उत्सर्जन करते हैं और कम शोर पैदा करते हैं।
लेकिन असली समस्या ये है कि लोग “ग्रीन लेबल” वाले पटाखों की पहचान नहीं कर पाते, जिससे बाज़ार में नकली पटाखों की बिक्री बढ़ जाती है।
📉 प्रदूषण का आर्थिक असर
प्रदूषण सिर्फ सेहत नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में प्रदूषण के कारण औसतन हर साल करीब Rs. 10,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है — अस्पताल खर्च, कार्यक्षमता में कमी और ट्रैफिक जाम की वजह से।
🔥 आगे क्या? समाधान की दिशा में कदम
- कठोर नियमों का पालन: पटाखे बेचने और चलाने पर निगरानी मजबूत करनी होगी।
- सार्वजनिक जागरूकता: त्योहारों में जिम्मेदारी से जश्न मनाने की आदत डालनी होगी।
- पराली समाधान: किसानों को वैकल्पिक उपाय जैसे Happy Seeder मशीन उपलब्ध करानी होगी।
- ग्रीन टेक्नोलॉजी: इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा का प्रसार जरूरी है।
अगर अब भी समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में दिवाली पर केवल पटाखे नहीं, बल्कि सांसें भी बुझ सकती हैं।
🔎 निष्कर्ष: खुशियों की दिवाली या खतरनाक हवा?
दिवाली खुशियों का पर्व है, लेकिन हमें समझना होगा कि खुशियां अगर किसी और की जिंदगी पर बोझ बनें तो वो जश्न नहीं, अपराध है। ग्रीन पटाखों की अनुमति देना एक अच्छा कदम था, पर जब तक जनता जिम्मेदारी नहीं निभाएगी, तब तक दिल्ली की हवा में हर दिवाली के बाद सिर्फ धुआं ही रहेगा।
❓ FAQs: दिवाली और प्रदूषण पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या ग्रीन पटाखे वास्तव में कम प्रदूषण फैलाते हैं?
हाँ, ये सामान्य पटाखों से लगभग 30% कम PM और धुआं छोड़ते हैं। परंतु अगर इनका अत्यधिक उपयोग हो, तो ये भी हवा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
2. दिवाली पर दिल्ली में AQI इतना ज्यादा क्यों बढ़ जाता है?
पटाखों का धुआं, पराली जलना और ठंडी हवा का मिलाजुला असर स्मॉग को बढ़ा देता है।
3. क्या दिल्ली में अब फिर से पटाखों पर बैन लगेगा?
संभावना है कि सरकार अगले साल फिर से सख्त प्रतिबंध लगाए, क्योंकि इस साल के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।
4. लोगों को खुद क्या करना चाहिए?
पटाखों का सीमित उपयोग करें, मास्क पहनें, पौधे लगाएं और सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें।
5. क्या बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह हवा खतरनाक है?
हाँ, बिल्कुल। कमजोर फेफड़ों वाले लोगों के लिए यह हवा सांस की बीमारियां बढ़ा सकती है।
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