
एनडीए गठबंधन की सीट रणनीति
एनडीए गठबंधन में प्रमुख दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जदयू और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हैं। एनडीए ने सीट बंटवारे में अधिकांश सीटें जदयू और भाजपा को दी हैं, जबकि छोटे सहयोगी दलों के लिए भी विशेष आरक्षित सीटें रखी गई हैं।
भाजपा का फोकस
भाजपा ने खासकर शहरी और मध्यम वर्ग वाले क्षेत्रों में अपना प्रभुत्व बनाए रखने पर जोर दिया। पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेताओं और मौजूदा विधायकों को उन सीटों पर रखा जहां उनका जीतना अपेक्षित था।
जदयू की स्थिति
जदयू ने ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अपनी मजबूत पकड़ दिखाने की कोशिश की। पार्टी ने किसानों और युवाओं को ध्यान में रखते हुए अपनी सीटें चुनीं। इसके अलावा जदयू ने नए उम्मीदवारों को भी मौका दिया ताकि युवा मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके।
छोटे सहयोगी दलों की हिस्सेदारी
एनडीए में छोटे दल जैसे हम, VIP और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों को उनके प्रभाव वाले जिलों में सीटें दी गईं। इससे गठबंधन में संतुलन बना रहा और सभी दलों को महत्व महसूस हुआ।
महागठबंधन की सीट बंटवारा प्रक्रिया
महागठबंधन में कांग्रेस, राजद, रालोसपा, वाइएसआर कांग्रेस जैसे दल शामिल हैं। महागठबंधन में सीट बंटवारे की प्रक्रिया थोड़ी जटिल रही। विभिन्न दलों के बीच लंबे समय तक बातचीत और टकराव चलता रहा।
कांग्रेस का दबदबा
कांग्रेस ने महागठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सीटों का दावा किया। पार्टी ने शहरों और कस्बों में अपनी चुनावी रणनीति के अनुरूप सीटें मांगी।
राजद की भूमिका
राजद ने बिहार में ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अपनी पकड़ को देखते हुए सीटों पर जोर दिया। पार्टी ने उम्मीदवारों की सटीक पहचान और क्षेत्रीय प्रभाव के आधार पर सीटें चुनीं।
छोटे दलों के लिए सीटें
महागठबंधन ने अपने छोटे सहयोगी दलों जैसे रालोसपा और वाइएसआर कांग्रेस को भी उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में सीटें दीं। इससे गठबंधन में सभी दल संतुष्ट रहे और साझा मंच पर चुनाव लड़ने की स्थिति बनी।
सीट बंटवारे के प्रमुख संघर्ष
सीट बंटवारे की प्रक्रिया में दोनों गठबंधनों में कई बार टकराव और संघर्ष देखा गया। विशेष रूप से महागठबंधन में सीटों को लेकर लंबे समय तक बहस हुई। कुछ महत्वपूर्ण संघर्ष इस प्रकार रहे:
- कांग्रेस और राजद के बीच मुख्य और महत्वूपर्ण सीटों का अधिकार
- छोटे दलों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या और स्थान
- महिलाओं और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की मांग
- शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उम्मीदवारों की रणनीति पर विचार-विमर्श
इन संघर्षों के बावजूद अंत में महागठबंधन ने सीट बंटवारा पूरा कर लिया और सभी दलों ने साझा मंच पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
चुनावी रणनीतियां और संभावित प्रभाव
Bihar Election 2025 में सीट बंटवारे के बाद दोनों गठबंधनों ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप दे दिया है। कुछ प्रमुख रणनीतियां इस प्रकार हैं:
एनडीए की रणनीति
- भाजपा और जदयू अपने मजबूत क्षेत्रों में वोट बैंक को मजबूत करेंगे।
- किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए विकास और रोजगार संबंधी वादे।
- छोटे सहयोगी दलों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में समर्थन बढ़ाना।
महागठबंधन की रणनीति
- ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में राजद की पकड़ मजबूत करना।
- कांग्रेस के माध्यम से शहरी और मध्यम वर्ग पर ध्यान केंद्रित करना।
- छोटे दलों और स्थानीय नेताओं के जरिए व्यापक समर्थन हासिल करना।
विश्लेषकों का कहना है कि सीट बंटवारे के बाद अब चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से विकास, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर होगा। मतदाता भी अब गठबंधन की मजबूती और उम्मीदवारों की पहचान पर ध्यान देंगे।
निष्कर्ष – Bihar Election 2025
Bihar Election 2025 में एनडीए और महागठबंधन ने सीट बंटवारे की प्रक्रिया पूरी कर ली है। एनडीए ने सबसे पहले सीटें तय कीं, उसके बाद महागठबंधन ने कड़ी बातचीत और संघर्ष के बाद सीटें फाइनल कीं। यह सीट बंटवारा अब आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करेगा।
चुनाव में अब मुख्य मुकाबला उन सीटों पर होगा, जहां दोनों गठबंधन की पकड़ मजबूत है। आगामी महीनों में प्रचार, उम्मीदवारों की घोषणा और चुनावी रणनीतियों पर नजर रहेगी।
FAQ (Bihar Election 2025)
1.Bihar Election 2025 में एनडीए और महागठबंधन ने कब सीट बंटवारा पूरा किया?
एनडीए ने सबसे पहले सीटें तय कीं और महागठबंधन ने संघर्ष के बाद सीट बंटवारा पूरा किया।
2. एनडीए गठबंधन में कौन-कौन से दल शामिल हैं?
भाजपा, जदयू, हम, VIP और अन्य छोटे सहयोगी दल।
3. महागठबंधन में कौन शामिल है?
कांग्रेस, राजद, रालोसपा, वाइएसआर कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल।
4. सीट बंटवारे में सबसे बड़े संघर्ष किसके बीच रहे?
महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के बीच महत्वपूर्ण सीटों पर बहस और संघर्ष देखने को मिला।
5. आगामी चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या होंगे?
विकास, रोजगार, ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के लिए सामाजिक योजनाएं और उम्मीदवारों की पहचान प्रमुख मुद्दे होंगे।
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