Chhath Puja 2025: का इतिहास और महत्व
Chhath Puja 2025 का इतिहास हजारों साल पुराना है। इसे सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए मनाया जाता है।
- यह पर्व स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है।
- व्रती निर्जला उपवास रखते हैं और नदी, तालाब या पंडित स्थल पर सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
- संध्या और सुबह के अर्घ्य का महत्व अलग-अलग होता है। संध्या अर्घ्य में दिनभर के काम और प्रार्थना के बाद सूर्य को धन्यवाद दिया जाता है।
- सुबह का अर्घ्य नई ऊर्जा और जीवन में सकारात्मकता के लिए दिया जाता है।
संध्या अर्घ्य: सोमवार की विशेष पूजा
संध्या अर्घ्य छठ पूजा का पहला महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान व्रती नदी या तालाब किनारे दीप जलाकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
- व्रती उपवास रखते हैं और शुद्ध आहार का सेवन करते हैं।
- संध्या अर्घ्य में सूर्य को दीप और जल अर्पित किया जाता है।
- पूजा में विशेष रूप से संतुलित प्रसाद जैसे फल, ठेकुआ और नारियल शामिल होते हैं।
- यह समय परिवार और समाज में मेलजोल और सामूहिक पूजा का प्रतीक है।
सुबह का अर्घ्य: मंगलवार की पूजा
सुबह का अर्घ्य छठ पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इसे उषा अर्घ्य कहा जाता है।
- व्रती सूर्य की पहली किरण के साथ पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं।
- इस चरण में व्रती अपनी मनोकामनाओं की प्राप्ति और स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
- सुबह अर्घ्य का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि इसे सूर्य देव की ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
- सभी व्रती स्नान और पूजा से पूर्व स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं।
पूजा की सामग्री और तैयारी
छठ पूजा के लिए विशेष सामग्री की जरूरत होती है:
- नदी या तालाब का साफ पानी
- फल और ठेकुआ
- साफ कपड़े और पूजा स्थल की सजावट
- दीपक और दीपक रखने के लिए विशेष पात्र
- नारियल, गेहूं या चने का प्रसाद
पूजा से पहले घर और नदी किनारे की सफाई अनिवार्य है। व्रती निर्जला व्रत रखते हैं और पूरे परिवार की शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
देश भर में छठ पूजा का उत्सव
छठ पूजा अब केवल बिहार तक सीमित नहीं है। पूरे भारत और विदेशों में इसका उत्सव मनाया जाता है:
- उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली में बड़े पैमाने पर छठ पूजा आयोजित होती है।
- विदेशों में नेपाल, अमेरिका, यूके और कनाडा में बसे भारतीय और नेपाली समाज इसे बड़े धूमधाम से मनाते हैं।
- सामूहिक पूजा और नदी किनारे दीप जलाना इस पर्व का मुख्य आकर्षण है।
व्रत की अवधि और नियम
छठ पूजा व्रत आमतौर पर 4 दिन चलता है:
- पहला दिन: नहाय-खाय — व्रती स्नान करते हैं और विशेष आहार ग्रहण करते हैं।
- दूसरा दिन: खरना — दिनभर उपवास के बाद शाम को खीर, फल और मिठाई का सेवन किया जाता है।
- तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य — सूर्य को दीप और जल अर्पित किया जाता है।
- चौथा दिन: सुबह का अर्घ्य — सूर्य को जल अर्पित करके व्रत पूरा किया जाता है।
Chhath Puja 2025 का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है:
- यह परिवार और समाज में मेलजोल और एकजुटता को बढ़ावा देता है।
- परंपरागत रीति-रिवाजों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाता है।
- स्वच्छता, संयम और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सिखाता है।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
सूर्य देव और छठी मैया की आराधना
सूर्य देव और छठी मैया को अर्घ्य देने से स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली की कामना होती है। व्रती निर्जला व्रत रखते हैं और पूरे मन से प्रार्थना करते हैं।
- सूर्य देव ऊर्जा और जीवन का स्रोत हैं।
- छठी मैया माता के रूप में रक्षा और आशीर्वाद देती हैं।
- पूजा में दीप और जल अर्पित करना आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक है।
Chhath Puja 2025: COVID के बाद उत्सव
पिछले कुछ वर्षों में महामारी के कारण उत्सव सीमित रूप में मनाया गया। लेकिन इस साल 2025 में देशभर में बड़े पैमाने पर छठ पूजा मनाई जाएगी। लोग नदी किनारे दीप जलाने और सामूहिक पूजा में भाग लेने के लिए उत्साहित हैं।
Chhath Puja 2025: के दौरान विशेष उपाय और सुझाव
- व्रतियों को निर्जला व्रत रखते समय पर्याप्त पानी और प्राकृतिक आहार का ध्यान रखना चाहिए।
- नदी और तालाब की सफाई और सुरक्षा सुनिश्चित करें।
- स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
- समाज और परिवार में सहयोग और सामूहिक प्रयास को बढ़ावा दें।
निष्कर्ष – Chhath Puja 2025
छठ पूजा 2025 पूरे देश के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है। संध्या अर्घ्य और सुबह के अर्घ्य के माध्यम से व्रती सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं। यह पर्व स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली का प्रतीक है। पूरे देश में इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
FAQ (Chhath Puja 2025)
1. छठ पूजा कब मनाई जाती है?
छठ पूजा 2025 में सोमवार को संध्या अर्घ्य और मंगलवार को सुबह का अर्घ्य के साथ मनाई जाएगी।
2. संध्या अर्घ्य और सुबह अर्घ्य में अंतर क्या है?
संध्या अर्घ्य सूर्य को धन्यवाद और दिनभर के कार्यों के लिए अर्पित किया जाता है। सुबह अर्घ्य नई ऊर्जा और सकारात्मकता के लिए किया जाता है।
3. छठ पूजा के दौरान क्या सामग्री चाहिए?
नदी या तालाब का साफ पानी, फल, ठेकुआ, नारियल, दीपक, और साफ कपड़े।
4. क्या छठ पूजा केवल बिहार में मनाई जाती है?
नहीं, यह पूरे भारत और विदेशों में भी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।
5. व्रत का पालन कैसे करें?
व्रती निर्जला व्रत रखते हैं, पूजा सामग्री का ध्यान रखते हैं और नदी या तालाब किनारे सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
Read More :- IND vs AUS 3rd ODI: भारत ने 9 विकेट से जीता मैच, शुभमन गिल ने रोहित-विराट की तारीफ में कही बड़ी बात
Read More :- मोहसिन नकवी की अकड़: ट्रॉफी देने के लिए रखी नई शर्त | Mohsin Naqvi Trophy Controversy



