उन्होंने कहाँ-कहाँ प्रतिभाग किया?
मुख्यमंत्री का दिन सुबह जल्दी शुरु हुआ। उन्होंने पहले मंदिरों में पूजा की और फिर सीधे निशाद बस्ती व मलिन बस्तियों की ओर रुख किया। इस कार्यक्रम की रूपरेखा प्रशासन द्वारा पहले ही तैयार की गई थी — “कोई घर ऐसा नहीं जहाँ दीप न जले” का मंत्र लेकर।
निशाद बस्ती (वॉर्ड नंबर 1, अबीरामदास नगर) में लगभग 400 लोगों के बीच मुख्यमंत्री ने सामुदायिक फलों-मिठाई वितरण, दीप प्रज्ज्वलन और बच्चों को उपहार देने का कार्यक्रम किया।
उसके बाद मलिन-बस्ती व वॉर्ड संख्या 31 के देवकाली इलाके में जाकर उन्होंने बच्चों के साथ दीप प्रज्ज्वलित किए, उन्हें उपहार दिए और बस्ती की सफाई-सज्जा की सराहना की।
कार्यक्रम की खास बातें
इस आयोजन में निम्न-मुख्य पहलू देखे गए:
- मुख्यमंत्री ने खुद बच्चों को मिठाई व उपहार बांटे।
- वृद्धों, महिलाओं एवं बहनों को फल-टोकरे व दीप दिए गए।
- दीपावली के अवसर पर बस्ती को झाँकी-आकृति में सजाया गया, बच्चों द्वारा कलाकृतियाँ प्रस्तुत की गईं, दीप जलने का दृश्य एक साथ दर्ज हुआ।
- स्थानीय प्रशासन ने बस्तियों में सफाई-सफाई, बिजली-प्रकाश व्यवस्था, रोड सज्जा की तैयारी की थी ताकि त्यौहार सुरक्षित एवं आनंदपूर्ण हो सके।
- प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संदेशों के अनुरूप- “हर घर दीप, हर परिवार खुशहाल।”
सामाजिक समावेशन का प्रतीक
निशाद बस्ती प्राथमिक रूप से नदी-किनारे नदी मछुआरों की जाति-समुदाय से जुड़ी है, जो भारतीय सामाजिक-आर्थिक परिप्रेक्ष्य में पिछड़ी हुई मानी जाती है।
इस प्रकार मुख्यमंत्री का वहां जाना यह संदेश देता है कि त्यौहार सिर्फ रोज़-घर-पर्याय का नहीं है, बल्कि वह समाज के प्रत्येक हिस्से तक पहुँचना चाहिए — चाहे वह मलिन बस्ती हो या उपेक्षित समुदाय। यह “समावेशी विकास” और “सामूहिक खुशी” का उदाहरण है।
बस्ती-विकास और सफाई-सज्जा पर फोकस
” उन्होंने स्थानीय लोगों से आग्रह किया कि वे अपने मोहल्लों, गली-नालों को सजाएँ, दीप जलाएँ और त्यौहार का आनंद सुरक्षित रूप से मनाएँ।

” उन्होंने स्थानीय लोगों से आग्रह किया कि वे अपने मोहल्लों, गली-नालों को सजाएँ, दीप जलाएँ और त्यौहार का आनंद सुरक्षित रूप से मनाएँ।
साथ ही उन्होंने कहा कि यह त्यौहार केवल रूप-रंग का नहीं बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और समृद्धि का भी संदेश है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि मलिन बस्तियों तक बिजली-रोशनी, पर्याप्त पानी-सफाई पहुँचाना सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा: “यह मेरा सौभाग्य है कि मैं पहली दीपावली इस-बस्ती में आप सभी के बीच मना रहा हूँ। दीप जलाना सिर्फ रीत-रिवाज नहीं, यह उस ऊर्जा का प्रतीक है जो अंधकार पर विजय की है।”
उन्होंने आगे कहा: “मैं चाहता हूँ कि अयोध्या-धाम में हर घर में दीप जले, हर चेहरे पर खुशी हो, और कोई ऐसा परिवार न हो जिसे खुशी-त्यौहार से वंचित होना पड़े।”
इस पहल का पृष्ठभूमि और महत्व
अयोध्या में हुई नौवीं दीपोत्सव के बाद यह कार्यक्रम सामाजिक-सहभागिता को आगे ले जाने की दिशा में एक कदम था। इसमें त्योहार को सिर्फ धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि समाज-सतह पर भी मनाने की योजना बनी थी।
योगी सरकार पिछले वर्षों में “हर घर-दीप” और “स्वच्छता एवं समृद्धि” पर जोर रही है और यह बस्ती-विजिट उन्हीं नीतियों का रूप-रूपंतरण है।
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए क्या हुआ?
बस्तियों में बच्चों को चॉकलेट्स, स्पार्कलर्स, मिठाइयाँ और उपहार दिए गए। महिलाओं व वृद्धों को फल-टोकरे और दीप प्रज्ज्वलन के समय विशेष स्थान मिला। बच्चों ने मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी ली, उनके हाथों से दीप जलाए और गले मिलकर आभार जताया।
स्थानीय महिलाओं ने कहा कि “मुख्यमंत्री साहब हमारे बीच आए, यह हमें यह एहसास कराता है कि हम अकेले नहीं हैं, हमारी भी खुशी-त्यौहार की बात-गाँठ है।”
दीपावली का सांस्कृतिक और सामाजिक आयाम


दिवाली का त्यौहार भारत में प्रकाश, नव-उम्मीद और सामाजिक मिलन का प्रतीक है। जब यह त्यौहार मलिन-बस्तियों में, पिछड़े-वर्ग के बीच मनाया जाए, तो उसका अर्थ और भी गहरा हो जाता है। यह संदेश देता है कि विकास व खुशहाली सिर्फ मोटे-कॅम्पेन के लिए नहीं, बल्कि हर घर-परिवार तक पहुंचे।
इस कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि त्योहार सिर्फ दीपों तक सीमित नहीं; यह समरसता, एकता और ‘सबका साथ’ की भावना को भी अंकित करता है।
📈 राजनीतिक-प्रशासनिक परिप्रेक्ष्य
राजनीतिक रूप से देखें तो यह पहल मतदाताओं और जनता-संपर्क के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री का सीधे-सीधे मलिन-बस्तियों में जाना, सामाजिक रूप से पिछड़े समूहों के साथ त्यौहार मनाना, यह संकेत देता है कि सरकार जनता-सेवा व समावेश पर गंभीर है।
प्रशासन ने इस अवसर पर स्थानीय सुरक्षा, बिजली-पानी, सफाई व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी। वॉर्ड निवासी सफाई और सजावट में जुटे हुए थे। बस्ती-मूल्यांकन पहले-पहले किया गया था ताकि कार्यक्रम निर्बाध और सफल हो सके।
🔮 आगे की दिशा और संभावनाएँ
इस प्रकार के कार्यक्रम आने वाले वर्षों में त्योहार-समारोह और सामाजिक-विकास को जोड़ने का मॉडल बन सकते हैं। उदाहरणतः:
- मलिन-बस्तियों और पिछड़े-समुदायों में त्यौहार-प्रचार व सहभागिता बढ़ाना।
- लोकल-सप्लायर्स, स्व-उद्योगों व हस्तशिल्प को त्यौहार के अवसर पर बढ़ावा देना।
- सफाई-सज्जा, पब्लिक-लाइटिंग व इन्फ्रास्ट्रक्चर को त्यौहार के पहले सुनिश्चित करना।
- बच्चों और युवाओं को सांस्कृतिक-कार्यक्रमों में शामिल करके रिश्तों-बढ़ावा देना।
📝 निष्कर्ष
इस सोमवार की सुबह अयोध्या की निशाद-बस्ती और मलिन-बस्तियों में दीपावली मनाते योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ दीप नहीं जलाए — उन्होंने उम्मीद, समानता और सामाजिक-सतह पर मिलन की रोशनी जलाई।
जब मुख्यमंत्री खुद हाथ में दीप थाम लेते हैं, और बच्चों-महिलाओं-बूढ़ों के बीच खड़े होते हैं, तो यह त्योहार-समारोह से बढ़कर एक सामाजिक पखवाड़ा बन जाता है — जहाँ ‘प्रकाश’ सिर्फ दीये तक सीमित नहीं, बल्कि सभी-सामाजिक तबकों की जीवन-शैली में समाहित होता है।
❓ FAQs
Q1. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किस बस्ती में दीपावली मनाई?
उन्होंने अयोध्या के अबीरामदास नगर, वॉर्ड नंबर 1 (निशाद बस्ती) तथा वॉर्ड संख्या 31 की मलिन-बस्ती में गेहूं-मिठाई-दीप वितरण तथा समाज-सहभागिता कार्यक्रम किया।
Q2. यह आयोजन कब और क्यों किया गया?
मंगलवार-सोमवार की सुबह दिवाली के अवसर पर यह आयोजन हुआ। इसका उद्देश्य था छुट-चूत समुदायों तक त्योहार-उद्घोष पहुँचाना और “हर घर दीप, हर परिवार खुशहाल” वाली योजना को व्यवहार में लाना।
Q3. किस समुदाय के साथ उन्होंने विशेष रूप से जुड़ाव किया?
निशाद समुदाय-जो नदी-किनारे रहने वाली जातियाँ हैं और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े माने जाते रहे-के साथ विशेष रूप से कार्यक्रम हुआ।
Q4. इस कार्यक्रम का सामाजिक महत्व क्या है?
यह दिखाता है कि त्यौहार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक-समावेश, समानता और विकास का भी अवसर बन सकते हैं। सीमित बजट-बस्तियों में भी त्यौहार-आनंद पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।
Q5. आगे इस पहल का क्या प्रभाव हो सकता है?
आने वाले वर्षों में ऐसे मॉडलों से यह उम्मीद है कि मलिन-बस्तियों में लोक-सहभागिता बढ़ेगी, त्यौहार-उद्घोष से स्थानीय विकास-कार्यों का जुड़ाव होगा, और सामाजिक दूरी कम होगी।
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